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कावेरी जल विवाद में नई याचिका पर SC का इनकार

Ratna Netam
22 Sept 2026 3:51 PM IST
कावेरी जल विवाद में नई याचिका पर SC का इनकार
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नई दिल्ली। तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से जारी कावेरी नदी जल बंटवारा विवाद से जुड़ी एक नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में तमिलनाडु के हिस्से से 70 टीएमसी कावेरी जल कर्नाटक को दोबारा आवंटित करने समेत कई मांगें की गई थीं। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दोनों राज्य पहले से इस अंतर-राज्यीय जल विवाद को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं, इसलिए किसी सोसायटी की ओर से दायर ऐसी याचिका पर विचार करना उचित नहीं होगा।पीठ ने टिप्पणी की कि यदि दो राज्यों के बीच पहले से चल रहे विवाद में सोसायटियों की याचिकाओं पर भी सुनवाई शुरू कर दी गई तो इस तरह के मामलों का कोई अंत नहीं होगा। अदालत ने इसी आधार पर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
तमिलनाडु के हिस्से से 70 TMC पानी की थी मांग
सुप्रीम कोर्ट के सामने दाखिल याचिका में कई राहतों की मांग की गई थी। इनमें प्रमुख मांग तमिलनाडु को आवंटित कावेरी जल में से 70 टीएमसी पानी कर्नाटक को फिर से आवंटित करने की थी। अदालत ने इस मांग के गुण-दोष पर फैसला देने के बजाय याचिका को सुनवाई योग्य मानने से इनकार कर दिया।पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु पहले से ही अदालत के समक्ष अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं। ऐसे में इसी विवाद से संबंधित मांगों को लेकर अलग-अलग संगठनों की याचिकाएं स्वीकार करने से कानूनी प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि दो राज्यों के बीच जारी विवाद में यदि सोसायटियों की याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की गई तो ऐसी याचिकाओं का सिलसिला खत्म नहीं होगा। अदालत की टिप्पणी से स्पष्ट है कि उसने मौजूदा अंतर-राज्यीय विवाद में निजी सोसायटी की अलग याचिका के जरिए हस्तक्षेप करने से परहेज किया।यह आदेश कावेरी जल विवाद के व्यापक मुद्दे पर कोई नया जल आवंटन तय नहीं करता। अदालत ने केवल इस नई याचिका को स्वीकार करने से इनकार किया है।
पहले से जारी है दोनों राज्यों की कानूनी लड़ाई
कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। नदी का पानी सिंचाई, पेयजल और दूसरी आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। अलग-अलग समय पर पानी की उपलब्धता, बारिश और जलाशयों की स्थिति को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में कावेरी जल विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला दिया था और जल आवंटन में कुछ बदलाव किए थे। इसके बाद कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनियमन समिति जैसी संस्थाएं निर्धारित व्यवस्था के तहत जल प्रवाह और आवंटन से जुड़े मामलों को देखती रही हैं।
तमिलनाडु ने भी हाल में किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
मौजूदा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तमिलनाडु सरकार ने भी हाल में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। तमिलनाडु ने कर्नाटक से अपने हिस्से का कावेरी जल जारी कराने के लिए निर्देश देने की मांग की है। राज्य ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के 8 सितंबर के निर्देश के अनुपालन की मांग करते हुए 9 से 23 सितंबर तक बिलिगुंडुलु में प्रतिदिन 6,000 क्यूसेक पानी सुनिश्चित करने की मांग की है।तमिलनाडु ने अपनी याचिका में एक निश्चित अवधि के दौरान पानी की कमी की भरपाई की मांग भी की है। राज्य ने दावा किया है कि पानी की कमी से कावेरी बेसिन के किसानों और सिंचाई पर असर पड़ रहा है। ये तमिलनाडु सरकार के अदालत में रखे गए दावे हैं, जिन पर संबंधित पक्षों की कानूनी दलीलें अलग हो सकती हैं।
कावेरी का पानी दोनों राज्यों के लिए अहम
कावेरी नदी दक्षिण भारत की महत्वपूर्ण नदियों में शामिल है। इसका पानी कर्नाटक और तमिलनाडु के साथ-साथ नदी बेसिन के दूसरे क्षेत्रों में भी सिंचाई और पेयजल के लिए इस्तेमाल होता है। बारिश कम होने या जलाशयों में पानी घटने पर राज्यों के बीच जल छोड़ने की मात्रा को लेकर विवाद बढ़ जाता है।कर्नाटक में कावेरी बेसिन के जलाशयों की स्थिति और राज्य की अपनी जल आवश्यकताओं को लेकर तर्क दिए जाते रहे हैं। वहीं तमिलनाडु कावेरी डेल्टा में कृषि और सिंचाई की जरूरतों को आधार बनाकर निर्धारित मात्रा में पानी जारी करने की मांग करता रहा है।
नई याचिका से नहीं बदला जल आवंटन
सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि कावेरी नदी के पानी का मौजूदा बंटवारा बदल दिया गया है। अदालत ने 70 टीएमसी पानी के पुनः आवंटन की मांग करने वाली सोसायटी की याचिका पर विचार करने से ही इनकार किया है।इसलिए मौजूदा कानूनी और संस्थागत व्यवस्था के तहत कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच जल संबंधी मुद्दों पर सुनवाई और निर्णय की प्रक्रिया जारी रहेगी।
फिर चर्चा में कावेरी विवाद
सुप्रीम कोर्ट में सामने आए इस मामले ने कावेरी जल बंटवारे के पुराने विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। एक तरफ निजी सोसायटी ने तमिलनाडु के हिस्से से 70 टीएमसी पानी कर्नाटक को देने की मांग की थी, जिसे अदालत ने सुनने से इनकार कर दिया। दूसरी तरफ दोनों राज्यों के बीच पानी की उपलब्धता और निर्धारित हिस्से को लेकर मौजूदा कानूनी कार्यवाही जारी है।अदालत के रुख से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पहले से चल रहे अंतर-राज्यीय विवाद के समानांतर निजी सोसायटियों की याचिकाओं के जरिए जल आवंटन के मुद्दे को दोबारा खोलने पर पीठ ने सहमति नहीं जताई है।
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